अध्याय 6

Public Authority एवं PIO

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत लोक प्राधिकरण (Public Authority), जन सूचना अधिकारी (PIO), सहायक जन सूचना अधिकारी (APIO) तथा उनकी जिम्मेदारियों का विस्तृत अध्ययन।

परिचय

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 (Right to Information Act, 2005) भारत के प्रत्येक नागरिक को सरकारी अभिलेखों, दस्तावेजों, रिपोर्टों, आदेशों, नियमों, योजनाओं तथा सरकारी कार्यों से संबंधित सूचना प्राप्त करने का कानूनी अधिकार प्रदान करता है।

लेकिन प्रत्येक संस्था RTI Act के अंतर्गत नहीं आती। केवल वे संस्थाएँ जो अधिनियम की धारा 2(h) के अनुसार Public Authority (लोक प्राधिकरण) हैं, वे नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए बाध्य होती हैं।

महत्वपूर्ण तथ्य
Public Authority के प्रत्येक कार्यालय में एक या अधिक Public Information Officer (PIO) नियुक्त किए जाते हैं, जो नागरिकों द्वारा मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होते हैं।

Public Authority (लोक प्राधिकरण) क्या है?

RTI Act, 2005 की धारा 2(h) के अनुसार Public Authority वह संस्था है जिसकी स्थापना संविधान, संसद, राज्य विधानमंडल, सरकारी अधिसूचना या सरकारी आदेश द्वारा की गई हो अथवा जो सरकार के नियंत्रण या महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता के अंतर्गत कार्य करती हो।

RTI Act, 2005 की धारा 2(h) की विस्तृत व्याख्या

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 2(h) में Public Authority (लोक प्राधिकरण) की परिभाषा दी गई है। इस धारा के अनुसार वह प्रत्येक संस्था लोक प्राधिकरण मानी जाएगी, जो सरकार द्वारा स्थापित, नियंत्रित अथवा पर्याप्त रूप से वित्तपोषित हो।

धारा 2(h) का सार
  • संविधान द्वारा स्थापित संस्था।
  • संसद द्वारा बनाए गए कानून के अंतर्गत गठित संस्था।
  • राज्य विधानमंडल द्वारा बनाए गए कानून से स्थापित संस्था।
  • केंद्र या राज्य सरकार द्वारा अधिसूचना अथवा आदेश से गठित निकाय।
  • सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण में कार्यरत संस्था।
  • सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त संस्था।

Public Authority की प्रमुख श्रेणियाँ

संवैधानिक संस्थाएँ
  • राष्ट्रपति सचिवालय
  • उपराष्ट्रपति सचिवालय
  • प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
  • संसद
  • राज्य विधानमंडल
  • भारत निर्वाचन आयोग
  • भारत का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG)
सरकारी विभाग
  • जिलाधिकारी कार्यालय
  • अनुमंडल कार्यालय
  • प्रखंड कार्यालय
  • अंचल कार्यालय
  • पुलिस विभाग
  • राजस्व विभाग
  • स्वास्थ्य विभाग

RTI किन-किन विभागों पर लागू होती है?

RTI Act का उद्देश्य सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इसलिए अधिकांश सरकारी विभाग, कार्यालय एवं निकाय इसके अंतर्गत आते हैं।

क्रम विभाग RTI लागू
1 प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
2 सभी केंद्रीय मंत्रालय
3 सभी राज्य सरकार के विभाग
4 जिला पदाधिकारी (DM) कार्यालय
5 अनुमंडल पदाधिकारी (SDO)
6 प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO)
7 अंचल अधिकारी (CO)
8 पंचायत कार्यालय
9 नगर निगम / नगर परिषद
10 सरकारी अस्पताल
11 सरकारी विद्यालय एवं कॉलेज
12 सरकारी विश्वविद्यालय

सरकारी विभागों के उदाहरण

प्रशासनिक विभाग
  • जिला प्रशासन
  • अनुमंडल कार्यालय
  • प्रखंड कार्यालय
  • अंचल कार्यालय
  • राजस्व विभाग
  • भूमि सुधार विभाग
  • आपदा प्रबंधन विभाग
सामाजिक एवं विकास विभाग
  • शिक्षा विभाग
  • स्वास्थ्य विभाग
  • ग्रामीण विकास विभाग
  • मनरेगा कार्यालय
  • पंचायती राज विभाग
  • समाज कल्याण विभाग
  • महिला एवं बाल विकास विभाग
याद रखें
यदि कोई संस्था सरकारी नियंत्रण में कार्य करती है या सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करती है, तो अधिकांश परिस्थितियों में वह RTI Act के अंतर्गत Public Authority मानी जा सकती है।

सार्वजनिक उपक्रम (PSUs) एवं सरकारी कंपनियाँ

केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार के स्वामित्व या नियंत्रण वाली सार्वजनिक उपक्रम (Public Sector Undertakings - PSUs) भी RTI Act, 2005 के अंतर्गत Public Authority माने जाते हैं। इन संस्थाओं में भी जन सूचना अधिकारी (PIO) नियुक्त किए जाते हैं।

प्रमुख सरकारी कंपनियाँ
  • भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC)
  • भारतीय स्टेट बैंक (SBI)
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  • बैंक ऑफ बड़ौदा (BOB)
  • बीएसएनएल (BSNL)
  • एमटीएनएल (MTNL)
  • ओएनजीसी (ONGC)
  • एनटीपीसी (NTPC)
  • गेल (GAIL)
  • बीएचईएल (BHEL)
अन्य सार्वजनिक संस्थाएँ
  • भारतीय रेलवे
  • डाक विभाग
  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
  • विद्युत वितरण कंपनियाँ
  • जल संसाधन विभाग
  • नगर निगम
  • नगर परिषद
  • जिला परिषद
  • पंचायत समिति
  • ग्राम पंचायत

सरकारी बैंक एवं वित्तीय संस्थाएँ

सरकारी बैंक भी Public Authority हैं। नागरिक इनसे संबंधित अभिलेख, नियम, भर्ती प्रक्रिया, शाखा संबंधी जानकारी, ऋण नीति, सरकारी योजनाओं आदि से जुड़ी सूचना RTI के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं, यदि वह सूचना RTI Act की अपवाद श्रेणी में न आती हो।

उदाहरण
  • स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)
  • पंजाब नेशनल बैंक (PNB)
  • बैंक ऑफ इंडिया
  • इंडियन बैंक
  • यूको बैंक
  • केनरा बैंक
  • बैंक ऑफ महाराष्ट्र
  • यूनियन बैंक ऑफ इंडिया

सरकार से वित्तपोषित संस्थाएँ

यदि कोई संस्था, ट्रस्ट, सोसाइटी, शैक्षणिक संस्थान अथवा गैर-सरकारी संगठन (NGO) सरकार से पर्याप्त वित्तीय सहायता प्राप्त करता है, तो वह भी RTI Act की धारा 2(h) के अंतर्गत Public Authority माना जा सकता है।

उदाहरण
  • सरकारी अनुदान प्राप्त विद्यालय
  • सरकारी सहायता प्राप्त महाविद्यालय
  • सरकार द्वारा वित्तपोषित ट्रस्ट
  • सरकारी अनुदान प्राप्त गैर-सरकारी संगठन (NGO)
  • सरकारी सहायता प्राप्त अनुसंधान संस्थान

किन संस्थाओं पर सामान्यतः RTI लागू नहीं होती?

प्रत्येक निजी संस्था सीधे RTI Act के अंतर्गत नहीं आती। यदि कोई संस्था पूरी तरह निजी है तथा सरकार का उस पर स्वामित्व, नियंत्रण या पर्याप्त वित्तीय सहयोग नहीं है, तो उस संस्था से सीधे RTI द्वारा सूचना नहीं मांगी जा सकती।

संस्था सामान्य स्थिति
Private Company सीधे RTI लागू नहीं
Private School यदि सरकारी सहायता नहीं है तो सामान्यतः लागू नहीं
Private Hospital सीधे RTI लागू नहीं
Private Bank सीधे RTI लागू नहीं
Private Society सीधे RTI लागू नहीं

निजी संस्था से सूचना कब प्राप्त की जा सकती है?

यदि किसी निजी संस्था से संबंधित अभिलेख किसी सरकारी विभाग के पास उपलब्ध हैं, तो संबंधित सरकारी विभाग से RTI के माध्यम से वह सूचना प्राप्त की जा सकती है।

उदाहरण
किसी निजी विद्यालय की मान्यता, निरीक्षण रिपोर्ट, सरकारी अनुदान, मान्यता आदेश या सरकारी जांच रिपोर्ट शिक्षा विभाग के पास उपलब्ध हो सकती है। ऐसी स्थिति में RTI आवेदन निजी विद्यालय को नहीं, बल्कि संबंधित शिक्षा विभाग के PIO को भेजा जाएगा।

महत्वपूर्ण तथ्य

सरकारी संस्था

लगभग सभी सरकारी विभाग RTI के अंतर्गत आते हैं।

सरकारी बैंक

सरकारी बैंक एवं सार्वजनिक उपक्रम भी Public Authority हैं।

निजी संस्था

सीधे RTI लागू नहीं होती, किन्तु सरकारी अभिलेख उपलब्ध होने पर सूचना मिल सकती है।

Public Information Officer (PIO) कौन होता है?

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अंतर्गत प्रत्येक Public Authority में एक या अधिक Public Information Officer (PIO) नियुक्त किए जाते हैं। PIO वह अधिकारी होता है जो नागरिकों द्वारा दायर RTI आवेदन प्राप्त करता है, संबंधित शाखाओं से सूचना एकत्र करता है तथा निर्धारित समय-सीमा के भीतर आवेदक को सूचना उपलब्ध कराता है।

सरल शब्दों में
PIO वह अधिकारी है जो किसी सरकारी विभाग की ओर से RTI आवेदन का उत्तर देने के लिए अधिकृत होता है।

PIO की नियुक्ति

RTI Act की धारा 5 के अनुसार प्रत्येक Public Authority को पर्याप्त संख्या में Public Information Officer (PIO) नियुक्त करना आवश्यक है ताकि नागरिकों को समय पर सूचना उपलब्ध कराई जा सके।

विभाग

प्रत्येक विभाग में एक या अधिक PIO नियुक्त किए जाते हैं।

उत्तरदायित्व

सूचना उपलब्ध कराना PIO की वैधानिक जिम्मेदारी होती है।

समय सीमा

निर्धारित समय के भीतर सूचना देना अनिवार्य है।

PIO की मुख्य जिम्मेदारियाँ

क्रम जिम्मेदारी विवरण
1 RTI आवेदन प्राप्त करना आवेदन स्वीकार करना एवं उसका पंजीकरण करना।
2 रिकॉर्ड की जांच संबंधित शाखा से अभिलेख प्राप्त करना।
3 सूचना उपलब्ध कराना निर्धारित समय सीमा में सूचना देना।
4 अतिरिक्त शुल्क बताना यदि प्रतिलिपि शुल्क देय हो तो उसकी सूचना देना।
5 आंशिक सूचना देना जहाँ लागू हो, उपलब्ध सूचना देना तथा प्रतिबंधित भाग अलग करना।
6 आवेदन स्थानांतरित करना यदि सूचना अन्य विभाग से संबंधित हो तो उचित प्राधिकारी को भेजना।
7 उत्तर देना सूचना उपलब्ध कराने या अस्वीकार करने का कारण लिखित रूप में बताना।

PIO क्या नहीं कर सकता?

  • आवेदन लेने से मना नहीं कर सकता।
  • यह नहीं पूछ सकता कि सूचना क्यों चाहिए।
  • व्यक्तिगत राय या सलाह देने के लिए बाध्य नहीं है।
  • नया रिकॉर्ड या नई सूचना तैयार नहीं कर सकता।
  • रिकॉर्ड नष्ट नहीं कर सकता।
  • बिना कानूनी कारण सूचना रोक नहीं सकता।

Assistant Public Information Officer (APIO)

कुछ विभागों एवं उपकार्यालयों में Assistant Public Information Officer (APIO) भी नियुक्त किए जाते हैं। इनका मुख्य कार्य नागरिकों से RTI आवेदन प्राप्त करना तथा संबंधित PIO तक पहुँचाना होता है।

APIO की भूमिका
  • RTI आवेदन प्राप्त करना।
  • आवेदन की रसीद देना।
  • PIO को आवेदन भेजना।
  • आवेदक को आवश्यक मार्गदर्शन देना।
महत्वपूर्ण जानकारी

यदि आवेदन APIO को दिया जाता है, तो सामान्यतः उत्तर देने की समय-सीमा में अधिनियम के अनुसार अतिरिक्त समय जोड़ा जाता है।

PIO आवेदन प्राप्त होने के बाद क्या करता है?

चरण 1 : RTI आवेदन प्राप्त करता है।
चरण 2 : आवेदन का पंजीकरण करता है।
चरण 3 : संबंधित शाखा से रिकॉर्ड मंगाता है।
चरण 4 : रिकॉर्ड की जांच करता है।
चरण 5 : यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त शुल्क की सूचना देता है।
चरण 6 : निर्धारित समय-सीमा के भीतर सूचना उपलब्ध कराता है।
ध्यान रखें
यदि किसी आवेदन में मांगी गई सूचना उसी विभाग में उपलब्ध नहीं है, लेकिन किसी अन्य Public Authority के पास उपलब्ध है, तो PIO को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आवेदन संबंधित विभाग को स्थानांतरित करना चाहिए तथा आवेदक को इसकी सूचना भी देनी चाहिए।

आवेदन गलत विभाग में भेजने पर क्या होगा?

यदि किसी नागरिक ने RTI आवेदन ऐसे विभाग में भेज दिया है जहाँ मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं है, लेकिन वह सूचना किसी अन्य Public Authority के पास उपलब्ध है, तो संबंधित PIO को अधिनियम के अनुसार आवेदन उचित Public Authority को स्थानांतरित करना चाहिए तथा इसकी सूचना आवेदक को भी देनी चाहिए।

महत्वपूर्ण
यदि आवेदन गलत विभाग में पहुँच गया है, तो PIO का दायित्व है कि उसे उचित विभाग को अग्रेषित करे और आवेदक को इसकी जानकारी दे।

First Appellate Authority (FAA)

यदि आवेदक को समय पर सूचना प्राप्त नहीं होती, अधूरी सूचना मिलती है, गलत सूचना दी जाती है, या आवेदन अनुचित रूप से अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वह संबंधित विभाग के First Appellate Authority (FAA) के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है।

प्रथम अपील कब करें?
  • 30 दिनों में सूचना न मिले।
  • अधूरी सूचना मिले।
  • गलत सूचना मिले।
  • सूचना देने से मना कर दिया जाए।
  • अनुचित शुल्क मांगा जाए।
FAA क्या करता है?
  • PIO के निर्णय की समीक्षा करता है।
  • दोनों पक्षों को सुन सकता है।
  • सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दे सकता है।
  • आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।

PIO पर दंड (Penalty)

यदि PIO बिना उचित कारण सूचना देने में देरी करता है, गलत सूचना देता है, अधूरी सूचना देता है, या जानबूझकर सूचना रोकता है, तो सूचना आयोग उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है।

ध्यान दें
सूचना आयोग आवश्यक परिस्थितियों में RTI Act के प्रावधानों के अनुसार PIO पर आर्थिक दंड लगा सकता है और विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा कर सकता है।

महत्वपूर्ण समय-सीमाएँ

स्थिति समय सीमा
सामान्य RTI आवेदन 30 दिन
जीवन एवं स्वतंत्रता से संबंधित मामला 48 घंटे
यदि आवेदन APIO को दिया गया हो अधिनियम के अनुसार अतिरिक्त समय लागू हो सकता है
प्रथम अपील निर्धारित वैधानिक अवधि के भीतर

Public Authority एवं PIO का महत्व

पारदर्शिता
जवाबदेही
रिकॉर्ड तक पहुँच
जनभागीदारी

अध्याय का सारांश

  • Public Authority वह संस्था है जो RTI Act की धारा 2(h) के अंतर्गत आती है।
  • प्रत्येक Public Authority में PIO नियुक्त किया जाता है।
  • PIO नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होता है।
  • APIO आवेदन प्राप्त कर PIO तक पहुँचाता है।
  • समय पर सूचना न मिलने पर प्रथम अपील (FAA) की जा सकती है।
  • अनुचित विलंब या गलत कार्यवाही पर PIO के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई संभव है।

स्वयं जाँचें (MCQ)

1. Public Authority की परिभाषा RTI Act की किस धारा में दी गई है?

  1. धारा 2(h)
  2. धारा 3
  3. धारा 6
  4. धारा 19

2. RTI आवेदन का उत्तर देने के लिए विभाग में किस अधिकारी की नियुक्ति होती है?

  1. जिलाधिकारी
  2. PIO
  3. मुख्य सचिव
  4. SDM

3. यदि सूचना समय पर प्राप्त न हो तो सबसे पहले कहाँ अपील की जाती है?

  1. उच्च न्यायालय
  2. पुलिस थाना
  3. First Appellate Authority
  4. लोकसभा

अध्याय 6 पूर्ण हुआ

अब आप Public Authority, PIO, APIO तथा RTI के अंतर्गत आने वाले विभागों की भूमिका को अच्छी तरह समझ चुके हैं।

आवेदन गलत विभाग में भेजने पर क्या होगा?

यदि किसी नागरिक ने RTI आवेदन ऐसे विभाग में भेज दिया है जहाँ मांगी गई सूचना उपलब्ध नहीं है, लेकिन वह सूचना किसी अन्य Public Authority के पास उपलब्ध है, तो संबंधित PIO को अधिनियम के अनुसार आवेदन उचित Public Authority को स्थानांतरित करना चाहिए तथा इसकी सूचना आवेदक को भी देनी चाहिए।

महत्वपूर्ण
यदि आवेदन गलत विभाग में पहुँच गया है, तो PIO का दायित्व है कि उसे उचित विभाग को अग्रेषित करे और आवेदक को इसकी जानकारी दे।

First Appellate Authority (FAA)

यदि आवेदक को समय पर सूचना प्राप्त नहीं होती, अधूरी सूचना मिलती है, गलत सूचना दी जाती है, या आवेदन अनुचित रूप से अस्वीकार कर दिया जाता है, तो वह संबंधित विभाग के First Appellate Authority (FAA) के समक्ष प्रथम अपील कर सकता है।

प्रथम अपील कब करें?
  • 30 दिनों में सूचना न मिले।
  • अधूरी सूचना मिले।
  • गलत सूचना मिले।
  • सूचना देने से मना कर दिया जाए।
  • अनुचित शुल्क मांगा जाए।
FAA क्या करता है?
  • PIO के निर्णय की समीक्षा करता है।
  • दोनों पक्षों को सुन सकता है।
  • सूचना उपलब्ध कराने का आदेश दे सकता है।
  • आवश्यक निर्देश जारी कर सकता है।

PIO पर दंड (Penalty)

यदि PIO बिना उचित कारण सूचना देने में देरी करता है, गलत सूचना देता है, अधूरी सूचना देता है, या जानबूझकर सूचना रोकता है, तो सूचना आयोग उसके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है।

ध्यान दें
सूचना आयोग आवश्यक परिस्थितियों में RTI Act के प्रावधानों के अनुसार PIO पर आर्थिक दंड लगा सकता है और विभागीय कार्रवाई की भी अनुशंसा कर सकता है।

महत्वपूर्ण समय-सीमाएँ

स्थिति समय सीमा
सामान्य RTI आवेदन 30 दिन
जीवन एवं स्वतंत्रता से संबंधित मामला 48 घंटे
यदि आवेदन APIO को दिया गया हो अधिनियम के अनुसार अतिरिक्त समय लागू हो सकता है
प्रथम अपील निर्धारित वैधानिक अवधि के भीतर

Public Authority एवं PIO का महत्व

पारदर्शिता
जवाबदेही
रिकॉर्ड तक पहुँच
जनभागीदारी

अध्याय का सारांश

  • Public Authority वह संस्था है जो RTI Act की धारा 2(h) के अंतर्गत आती है।
  • प्रत्येक Public Authority में PIO नियुक्त किया जाता है।
  • PIO नागरिकों को सूचना उपलब्ध कराने के लिए उत्तरदायी होता है।
  • APIO आवेदन प्राप्त कर PIO तक पहुँचाता है।
  • समय पर सूचना न मिलने पर प्रथम अपील (FAA) की जा सकती है।
  • अनुचित विलंब या गलत कार्यवाही पर PIO के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई संभव है।

स्वयं जाँचें (MCQ)

1. Public Authority की परिभाषा RTI Act की किस धारा में दी गई है?

  1. धारा 2(h)
  2. धारा 3
  3. धारा 6
  4. धारा 19

2. RTI आवेदन का उत्तर देने के लिए विभाग में किस अधिकारी की नियुक्ति होती है?

  1. जिलाधिकारी
  2. PIO
  3. मुख्य सचिव
  4. SDM

3. यदि सूचना समय पर प्राप्त न हो तो सबसे पहले कहाँ अपील की जाती है?

  1. उच्च न्यायालय
  2. पुलिस थाना
  3. First Appellate Authority
  4. लोकसभा

अध्याय 6 पूर्ण हुआ

अब आप Public Authority, PIO, APIO तथा RTI के अंतर्गत आने वाले विभागों की भूमिका को अच्छी तरह समझ चुके हैं।